मुस्कराहट का कोई मोल नहीं

May 5, 2017
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महफिल मैं कुछ तो सुनाना पडता है,
ग़म छुपाकर मुस्कुराना पडता है,
कभी उनके हम भी थे दोस्त,
आज कल उन्हे याद दिलाना पडता है।

मुस्कराहट का कोई मोल नहीं होता,
कुछ रिश्तों का कोई तोल नहीं होता,
लोग तो मिल जाते है हर मोड़ पर..
हर कोई आप सब की तरह अनमोल नहीं होता।

यकीन नहीं तुझे अगर, तो आज़मा के देख ले,
एक बार तू, जरा मुस्कुरा के देख ले,
जो ना सोचा होगा तूने, वो मिलेगा तुझको भी,
एक बार आपने कदम, बढ़ा के देख ले।

कितना दूर निकल गए रिश्ते निभाते निभाते,
खुद को खो दिया हमने अपनों को पाते पाते,
लोग कहते है दर्द है मेरे दिल में,
और हम थक गये मुस्कुराते मुस्कुराते।

ज़िन्दगी के तूफानों का साहिल है दोस्ती,
दिल के अरमानों की मंज़िल है दोस्ती,
ज़िन्दगी भी बन जाएगी अपनी तो जन्नत,
अगर मौत आने तक साथ दे दोस्ती।

ज़िन्दगी के सारे गम क्यों बाँट लेते हैं दोस्त,
क्यों ज़िन्दगी में साथ देते हैं दोस्त,
रिश्ता तो सिर्फ उनसे दिल का होता है जी,
फिर भी क्यों हमे अपना मान लेते हैं दोस्त।

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