खामोशियाँ कर देतीं बयान

September 6, 2021
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मेरी कोशिश हमेशा से ही नाकाम रही
पहले तुझे पाने की अब तुझे भुलाने की।

ना चाहते हुए भी छोड़ना पड़ता है साथ कभी कभी,
कुछ मजबूरियां मुहब्बत से भी ज्यादा गहरी होती है।

सोचा न था वो शख्स भी इतना जल्दी साथ छोड़ जाएगा
जो मुझे उदास देखकर कहता था.. मैं हूँ ना।

ना तो अनपढ़ रहे न ही काबिल हुऐ हम
खामखा ऐ इश्क तेरे स्कूल में दाखिल हुए हम।

तुझे शिकायत है की मुझे बदल दिया वक़्त ने
कभी खुद से भी सवाल कर क्या तू वही है।

बड़ी हसरत थी कोई हम्हे टूट कर चाहे
लेकिन हम ही टूट गए किसी को चाहते चाहते।

आज क्यों तकलीफ होती है तुम्हें बेरुखी की
तुम्ही ने तो सिखाया है कैसे दिल जलाते हैं।

अगर मोहब्बत की हद नहीं कोई,
तो दर्द का हिसाब क्यूँ रखूं।

मेरे साथ चलना है तो दर्द सहने के आदी बन जाओ
मेरा मसला है काँटों से खेलना और तुम फूल जैसी हो।

एक बात सिखाई है. तजुर्वे ने हमें,
एक नया दर्द ही पुराने दर्द की दवा है।

खामोशियाँ कर देतीं बयान तो अलग बात है,
कुछ दर्द हैं जो लफ़्ज़ों में उतारे नहीं जाते।

हालात कह रहे है अब वो याद नही करेंगे
ओर उम्मीद कह रही है थोड़ा और इंतजार कर।

किससे पैमाने वफ़ा बाँध रही है बुलबुल,
कल न पहचान सकेगी गुल-ए-तर की सूरत।

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